वाराणसी: नेहरू युवा केंद्र, माय भारत वाराणसी युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वधान में आयोजित 16वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के छठे दिन युवाओं ने अपनी दैनिक नित्य क्रिया, स्वच्छता अभियान और योग के बाद क्षेत्र भ्रमण किया।
कार्यक्रम की शुरुआत सारनाथ स्थित सारंगनाथ मंदिर के दर्शन से हुई। इसके बाद परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया गया। पूर्व संध्या पर युवाओं ने सारनाथ के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया, जिनमें बुद्ध मंदिर, प्रथम उपदेश स्थल, मूलगंध कुटी विहार और अन्य महत्वपूर्ण स्थान शामिल थे।
स्वच्छता अभियान के बाद युवाओं ने 95 सीआरपीएफ कैंप का दौरा किया, जहां आलोक कुमार, सेकंड कमांडिंग ऑफिसर के नेतृत्व में सीआरपीएफ की टुकड़ी ने जनजातीय युवाओं का स्वागत किया। आलोक कुमार ने युवाओं को सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक हथियारों के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर उन्होंने कहा, "आदिवासी लोग प्रकृति के साथ जुड़कर पर्यावरण को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पूरी दुनिया में सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ पर है। युवा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें, नकारात्मकता से दूर रहें। समस्याएं होंगी, लेकिन उनका समाधान भी होगा। हिंसा से कोई समस्या हल नहीं होती, विकास के साथ चलना होगा। सरकार आपके साथ खड़ी है।"
इसके बाद, जनजाति युवा चांदमारी स्थित टीएफसी का दौरा करने पहुंचे, जहां उन्होंने म्यूजियम, दीनदयाल संकुल और पार्क का अवलोकन किया। इसके बाद, युवाओं ने उमराह स्थित प्रसिद्ध स्वरवेद महा मंदिर धाम का दौरा किया, जहां मंदिर प्रशासन के वीरेंद्र शर्मा, चंद्रमा प्रसाद और राजकरण यादव ने उन्हें सद्गुरु सदाफल देव के आध्यात्मिक दृष्टिकोण के बारे में विस्तार से बताया। मंदिर की अद्भुत छटा देखकर युवा मंत्रमुग्ध हो गए।
कार्यक्रम को सफल बनाने में नेहरू युवा केंद्र संगठन के उपनिदेशक माहे आलम, जिला युवा अधिकारी रामगोपाल, आयोजक जिला युवा अधिकारी प्रतीक साहू, प्रबंधक शीवधार यादव, राम सिंह अंगद सिंह, मनोज शर्मा, सहायक निदेशक गोपेश हस्तकला विभाग भारत सरकार और लेखा एवं कार्यक्रम सहायक सुभाष चंद्र का सहयोग सराहनीय रहा।
इस प्रकार, आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का यह दिन शिक्षाप्रद, सांस्कृतिक और आत्म-निर्भरता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था।