वाराणसी
: नेहरू युवा केंद्र, माय भारत, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय अंतर राज्य युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का समापन सारनाथ स्थित धमचक मेडिसिन सेंटर में हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि सुरेंद्र नाथ पाल ने हिमाचल प्रदेश के सोलन, सिरमौर, शिमला और मंडी से पधारे युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा युवा राष्ट्र है और इसके 60-65% युवा सकारात्मक सोच के साथ विकास की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने विचारों से भारत को आगे बढ़ाएं और प्रधानमंत्री जी के 2047 तक एक विकसित राष्ट्र के निर्माण के सपने को पूरा करने में योगदान दें।

मुख्य अतिथि ने बनारस को "लघु भारत" बताते हुए कहा कि इस शहर में महान विभूतियां जैसे आदि शंकर, भगवान बुद्ध, रविदास, कबीर, तुलसीदास और अन्य कई महान व्यक्ति पैदा हुए। उन्होंने कहा कि बनारस के ऐतिहासिक स्थलों को समझने के लिए पांच दिन बहुत कम हैं। समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए यू पी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति की जड़ें बहुत गहरी हैं, जो पूरे विश्व को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि वाराणसी को सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जाना जाता है।

प्राचार्य ने यह भी बताया कि काशी वही स्थान है, जहां महात्मा गौतम बुद्ध ने पांच शिष्यों को चेतन ज्ञान का उपदेश दिया था। उन्होंने युवाओं से अपने अनुभवों को साझा करने की अपील की। कार्यक्रम में प्रोफेसर डॉ. सुधीर कुमार राय ने भी युवाओं को उनकी मातृभूमि की संस्कृति को याद रखने की सलाह दी।

समारोह में शिविर के अनुभवों को रोहित शर्मा, अनुपम शर्मा, और भावना ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं को सम्मानित भी किया गया। इनमें जनपद सिरमौर के अनुराग, मंडी से शबनम, सिरमौर के अमित कुमार, और प्रखर वक्ता रोहित शर्मा आदि शामिल हैं।

समापन समारोह के दौरान नेहरू युवा केंद्र वाराणसी के लेखा एवं कार्यक्रम सहायक सुभाष चंद्र प्रसाद ने सभी का स्वागत किया, जबकि जिला युवा अधिकारी प्रतीक साहू ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में राकेश यादव, देवेंद्र, रिंकेश, सुरेश और अन्य ने सहयोग किया।

कार्यक्रम से पहले युवाओं को सारनाथ स्थित वृद्धाश्रम में भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने बुजुर्गों से सजीव बातचीत की, जिससे वहां के बुजुर्गों की आंखों में अपनत्व की भावना आ गई। कार्यक्रम में संस्था के निदेशक धीरेंद्र कुमार राय, डॉक्टर एस के पांडे, डॉ. रविंद्र कुमार, पारसनाथ यादव और अन्य विषय विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।