गाजीपुर: गाजीपुर के मरदह थाना क्षेत्र के नसीरुद्दीनपुर गांव में इस बार गौचर की जमीन पर उर्स मेले का आयोजन नहीं हो सका। गांव में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई और पुलिस कर्मी पूरे दिन चक्रमण करते रहे ताकि किसी भी प्रकार का विवाद न हो।
बताया गया है कि इस वर्ष उर्स मेले के आयोजन के लिए अनुमति नहीं मिली, क्योंकि जिस भूमि पर मेला आयोजित किया जाना था, वह विवादित थी और न्यायालय में मामला विचाराधीन था। यह भूमि गौचर के रूप में सुरक्षित थी, जहां कुछ स्थानीय व्यक्तियों ने अवैध रूप से मजार का निर्माण किया था। इस पर अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल के जिलाध्यक्ष दुर्गेश श्रीवास्तव ने उप जिलाधिकारी सदर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गांव के दो व्यक्ति, सोनू उर्फ इंटियाज और हदीश, ने गौचर की भूमि पर मजार बनाकर झाड़-फूंक और धर्म परिवर्तन का काम किया था। साथ ही, उसी भूमि पर उर्स मेला आयोजित करने की योजना बनाई थी।
शिकायत के बाद उप जिलाधिकारी ने मामले की जांच की और यह पाया कि भूमि न्यायालय में विवादित है, जिसके बाद मेले की अनुमति नहीं दी गई। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने गांव में पुलिस बल तैनात किया, जिसमें क्षेत्राधिकारी कासीमाबाद अनिल चन्द्र तिवारी, नायब तहसीलदार संतोष कुमार और एक सेक्शन पीएसी सहित चार उप निरीक्षक भी शामिल थे।
इस मामले पर उप जिलाधिकारी मनोज कुमार पाठक ने बताया कि शिकायतकर्ता द्वारा जमीन पर मजार बनाने और उर्स मेला आयोजित करने का आरोप लगाया गया था, जिस पर प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। वहीं, दुर्गेश श्रीवास्तव ने भी कहा कि यह मुद्दा गंभीर था और उन्होंने प्रशासन से अवैध मजार को हटाने की मांग की थी, जिस पर प्रशासन ने कार्रवाई की।
गांव में उर्स मेला न होने के कारण तनाव देखा गया और चारों ओर सन्नाटा पसरा रहा। लोग अपने घरों में बैठे हुए चर्चाओं में लगे रहे, जबकि पुलिस कर्मी पूरे दिन गश्त करते रहे ताकि किसी भी प्रकार का विवाद न हो।